क्या मालूम था की: -
१६०० ईसवीं में जिस कम्पनी की नींव व्यापर के लिए रखी जा रही है, वह आने वाले समय में दुनिया पर एक छत्र राज करेगी। जान कम्पनी की अभी समझ में नहीं आया तो याद दिला दूँ की जान कम्पनी का नाम बाद में बदल कर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी रख दिया गया। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना ३१ दिसंबर को हुई थी। ब्रिटेन की महारानी ने भारत के साथ व्यापार करने के लिए २१ वर्षो तक की छूट दी थी। लेकिन कम्पनी ने भारत के लगभग समस्त भू- भाग पर अपना सैनिक और प्रशासनिक अधिपत्य जमा लिया।
सोने की चिड़िया: -
१४९८ ईसवीं को वास्को दी गामा ने उत्त्माशा द्वीप यानि केप ऑव गुड होप द्वारा भारत यात्रा के लिए समुद्री मार्ग खोज लिया। तब यह मार्ग संसार के इतिहास में क्रांतिकारी मार्ग व्यापार के लिए खुला। बस यूरोपीय देशो ने भारतीय परिवेश में उत्पन्न प्राकृतिक खजाने के साथ मानव संसाधन जैसे बहुमूल्य सोने से अलंकृत सोने की चिड़िया से अपना घरोंदा बनाना शुरू कर दिया। बस तभी सब ने इस चिड़िया को दबोचना चाहा, सर्वप्रथम पुर्तगाल ने एकाधिकार करने की कोशिश करी जिसमें रोड़ा बने होलैंड और इंग्लैंड।
इंग्लैंड की ईस्ट इंडिया की स्थापना, स्पेनी आर्मादा की पराजय के बाद महारानी एलिजाबेथ के आशा पत्र द्वारा (३१ दिसंबर १६०० ईसवीं ) "दा गवर्नर एंड मर्चेंट ऑव लन्दन ट्रेडिंग टु ईस्ट इंडीज़" के नाम से हुई। इसी कम्पनी का आगे चल कर ईस्ट इंडिया कम्पनी नाम पड़ा और भली प्रकार से भारत के मानव संसाधन के साथ प्राकृतिक सम्पदा का दोहन इस कम्पनी ने २०० वर्षो तक किया। तब भारत छोटी छोटी रियासतों में बँटा हुआ था और हर किसी का कही न कही लालच निहित था।
और कुछ नया हो गया: -
आज उसी ईस्ट इंडिया का हुक मिला है भारती के लाल को, यह व्यक्ति है मुंबई के रहने वाले संजीव मेहता। जिनके अथक प्रयास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया की वह उस कम्पनी के मालिक बने जिसने भारतीय जनता से २०० वर्षो तक हंसने, खेलने जैसी कुदरती इनायत भी छीन ली थी। यह कम्पनी लन्दन के लोगो को विलासिता का जीवन जीने में मदद करने वाले पदार्थो का व्यापार करेगी। साथ ही आने वाले समय में भारत में भोजन सामग्री, फर्नीचर, रियल स्टेट, स्वास्थ जैसी सेवाओ में अपना योगदान देगी।जिस बड़ी कम्पनी ने दुनिया को अपनी उंगलियों पर नचाया आज वह एक कर्मठ, लगनशील, निष्ठावान भारतीय के हुक्म की मोहताज़ है। हमें गर्व है ऐसे भारत माँ के लाल पर जिसने देश के सम्मान को पाने के लिए जीवन जिया.......
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