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बुधवार, 7 जुलाई 2010

समय का निरंतर चलता चक्र, सामना कराता कल से, बीते हुए कल से

क्या मालूम था की: -
१६०० ईसवीं में जिस कम्पनी की नींव व्यापर के लिए रखी जा रही है, वह आने वाले समय में दुनिया पर एक छत्र राज करेगी। जान कम्पनी की अभी समझ में नहीं आया तो याद दिला दूँ की जान कम्पनी का नाम बाद में बदल कर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी रख दिया गया। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना ३१ दिसंबर को हुई थी। ब्रिटेन की महारानी ने भारत के साथ व्यापार करने के लिए २१ वर्षो तक की छूट दी थी। लेकिन कम्पनी ने भारत के लगभग समस्त भू- भाग पर अपना सैनिक और प्रशासनिक अधिपत्य जमा लिया।
सोने की चिड़िया: -
१४९८ ईसवीं को वास्को दी गामा ने उत्त्माशा द्वीप यानि केप ऑव गुड होप द्वारा भारत यात्रा के लिए समुद्री मार्ग खोज लिया। तब यह मार्ग संसार के इतिहास में क्रांतिकारी मार्ग व्यापार के लिए खुला। बस यूरोपीय देशो ने भारतीय परिवेश में उत्पन्न प्राकृतिक खजाने के साथ मानव संसाधन जैसे बहुमूल्य सोने से अलंकृत सोने की चिड़िया से अपना घरोंदा बनाना शुरू कर दिया। बस तभी सब ने इस चिड़िया को दबोचना चाहा, सर्वप्रथम पुर्तगाल ने एकाधिकार करने की कोशिश करी जिसमें रोड़ा बने होलैंड और इंग्लैंड।
इंग्लैंड की ईस्ट इंडिया की स्थापना, स्पेनी आर्मादा की पराजय के बाद महारानी एलिजाबेथ के आशा पत्र द्वारा (३१ दिसंबर १६०० ईसवीं ) "दा गवर्नर एंड मर्चेंट ऑव लन्दन ट्रेडिंग टु ईस्ट इंडीज़" के नाम से हुई। इसी कम्पनी का आगे चल कर ईस्ट इंडिया कम्पनी नाम पड़ा और भली प्रकार से भारत के मानव संसाधन के साथ प्राकृतिक सम्पदा का दोहन इस कम्पनी ने २०० वर्षो तक किया। तब भारत छोटी छोटी रियासतों में बँटा हुआ था और हर किसी का कही न कही लालच निहित था।

और कुछ नया हो गया: -
आज उसी ईस्ट इंडिया का हुक मिला है भारती के लाल को, यह व्यक्ति है मुंबई के रहने वाले संजीव मेहता। जिनके अथक प्रयास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया की वह उस कम्पनी के मालिक बने जिसने भारतीय जनता से २०० वर्षो तक हंसने, खेलने जैसी कुदरती इनायत भी छीन ली थी। यह कम्पनी लन्दन के लोगो को विलासिता का जीवन जीने में मदद करने वाले पदार्थो का व्यापार करेगी। साथ ही आने वाले समय में भारत में भोजन सामग्री, फर्नीचर, रियल स्टेट, स्वास्थ जैसी सेवाओ में अपना योगदान देगी।
जिस बड़ी कम्पनी ने दुनिया को अपनी उंगलियों पर नचाया आज वह एक कर्मठ, लगनशील, निष्ठावान भारतीय के हुक्म की मोहताज़ है। हमें गर्व है ऐसे भारत माँ के लाल पर जिसने देश के सम्मान को पाने के लिए जीवन जिया.......

रविवार, 7 मार्च 2010

आपके लिए हाँ आपके लिए

दीवाना सोचता रहा प्यार कब हुआ, दिल किसी का हो गया पता ना चला
कांच की तरह दिल टुकडो में बिखर गया, देखो कैसे कतरा-कतरा मिटटी में मिल गया
रेत रुकता नहीं हथेली के बीच में, अजी दिल भी कहीं कम था रेत से
सीने में रुक ना सका हमारे, कब आप का हो गया पता कहा चला
आप भी खुदगर्ज़ कम नहीं थे, पलट कर देखा नहीं आपने कि
बेखबर दिल आपके बिना, दुनिया छोड़ तो ना गया
क्यों आप इतने प्यारे थे, मर मिटे हम आप पर
पर ये समझ ना सके, आप तो कभी थे ही नहीं हमारे
ख़ुशी क्या दुःख भी आपके हो ना सके हमारे
जानते है कि जन्म ये आपके बिना कट ना सकेगा
पर क्या कहें इबादत में दुआ भी निकलती है आपके लिए
पर अब मान भी लो उठने से सोने तक हर बात सिर्फ आपके लिए
सपने तो देख पाते नहीं अब, नींद भी कमबख्त आती किसे है
कह ना पाएंगे आप से कि क्या है आप हमारे लिए
हाल एसा है जैसे तडपे चाँद चांदनी के लिए
हो सकें तो इतना करना जब हम ना रहे तो, शमशान में आकर चिता को नजर भर देख लेना
वादा रहा अगला जन्म भी न्योछावर है आपके लिए..... सनम आपके लिए..... हाँ आपके लिए

शनिवार, 13 फ़रवरी 2010

लापरवाही या साजिश


आज नॉएडा के प्रधान डाक घर में एक फार्म लेने के लिए मैं गया, यह उत्तर प्रदेश में फूड इंस्पेक्टर की होबे वाली परीक्षा के लिए है। लेकिन मज़े की बात है कि, "यह उपलब्ध नहीं क्योकि फॉर्म कम पद गए है ऐसा कहना है डाक घर के कर्मचारी का।"

उत्तर प्रदेश सरकार आम जनता को फॉर्म भी छपवा कर नहीं दे सकती वैसे हजारो करोड़ की संपत्ति स्वहा की जा सकती है यह हाल नॉएडा का ही नहीं बल्कि लगभग राज्य के सभी जिलो की है कब कौन सी नियुक्ति हो रही है कोई नहीं जनता.....

शायद यह बात सब को हल्की लगे लेकिन इसके परिणाम गंभीर होने की सम्भावना है।

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010

तो बोलिए जय महाशिव-शक्ति की

महाशिवरात्रि नाम से पुरुष प्रधान समझ की व्याख्या होती है जबकि कही भी उल्लेख नहीं की शिव ने शक्ति के बिना अपना अस्तित्व वताया हो, शिव ने तो बिना शक्ति के रूद्र का रूप लिया फिर हम शिव महादेव को मजबूर कर रहे है कि वह फिर से रूद्र रूप लेकर दुनिया का सर्वनाश करें।

हम कब महिलाओ को उनका वह स्थान देंगे जिसकी वो हकदार है, तो अकेले शिव का नाम ना ले क्योकि मेरा मानना है कि खुद महादेव भी नहीं चाहेंगे कि उनका नाम अकेले लिया जाये  उनके साथ आदि शक्ति माँ का वर्णन भी किया जाये ऐसा मेरा मत है।

आज का दिन महाशिवरात्रि ना होकर महाशिवशक्ति रात्रि होना चाहिए, क्योकि अगर हमारी आदरणीय महिलाये अपनी शादी की सालगिरह अकेले मनाने लगी तो पुरुष प्रधान समाज को धक्का लगना स्वाभाविक है.............
तो बोलिए जय महाशिव शक्ति की

बुधवार, 10 फ़रवरी 2010

जय श्री राम


राजेन्द्र यादव-पत्रिका-हंस- "राम का कोई अस्तित्व नहीं था नहीं ही कोई राम कभी हुए और यदि हुए भी तो वह मर्यादा पुरुष नहीं थे" यह वक्तव्य इंडिया टीवी पर शाम ०७.०२.१० को आया जब श्री राम के होने न होने के लिए बहस छिड़ी हुई थी, एक महा महान आदमी और थे वह दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षा देने का कार्य कर रहे है ।

इन दोनों महानुभाव से मेरा एक सवाल की क्या आपको अपने से पहली दसवीं पुश्त के पिता का नाम मालूम है ? यदि है तो अपनी पहले पिता से लेकर अपने तक की वंशावली दुनिया को दिखाए क्योकि आपके उस खानदान के होने का मुझको यकीं नहीं क्योकि इतिहास सबूत मांगता हैं (आपके ही शब्द है)
आपने यह भी कहा की श्रीलंका ने आपने पर्यटन को विस्तार देने के लिए यह सबूत दिए है की राम का अस्तित्व है, उल्लू के चरखो शर्म करो यदि आपको उनके होने का अभी शक है तो आप जिस खानदान से है उसके आप हैं मुझको शक है..................
अंत में इतना ही की श्री राम के सबूत यही है की अयोध्या नगरी आज भी है रामेश्वरम में शिव पूजा आज भी है और श्रीलंका जो वास्तव में है वही कभी लंका हुई और महान पंडित रावन नॉएडा के पास के एक गावं थे ।
शिवतांडव, रामचरित्र मानस, वाल्मीकि रामायण यह भी सबूत है और अगर चाहिए तो निकल कर आपने कार्यालय से बहार आये जनता जिसके दिल में राम है वो आप को बकाएदा राम के दर्शन भी कराएगी और सबूत भी देगी.........आप जैसे चरखो ने मूर्खो ने पहले भी देश का बेडागरक किया है और आज भी कर रहे हो चप्पल के यार जो हो
"जय श्री राम"
Note: (और हाँ साथ ही भारतीय सरकार जाग जाये वरना नेता जी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद के सबूत भी मागेंगी हमारी आने वाली संताने जो इनकी तरह ही निर्लज होंगी क्योकि जो दिखता है वही होता है और आज सिर्फ गाँधी-नेहरु परिवार ही दिख रहा है चारो ओर यहाँ तक की एक रूपये से लेकर एक हज़ार तक के नोट पर भी..................)

शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010

माँ तेरे लिए हम कुछ नहीं कर सकते

यह खबरें पढ़ कर भारत के बारे में क्या कल्पना की जानी चाहिए ? जिस देश को सतत विकास की जरुरत है वह की ताज़ा-तरीन खबरें यही बताती है की भारत माँ के छोटे-छोटे टुकड़े होने वाले है।

मजाक नहीं है यह और न ही इसको हल्के में लेने का दुसाहस कीजियेगा अमीर-गरीब, बड़ा-छोटा, हिंदी-मराठी, उत्तर भारतीय-दक्षिण भारतीय और साक्षर-निरक्षर में देश बंट चुका है बस इंतजार उस पल का है जब भारत माँ खुद कहे की इससे तो मैं भारत माँ ही नहीं होती और न ये कपूत मुझको हर बार की तरह तार-तार करते...............माँ तेरे बेटे अब कपूत हो गए है उनको प्यार पैसे से है या अपने स्वार्थ से
1.) बाटला हाउस मुठभेड़ पर सवाल उठाकर चौतरफा हमला झेल रहे कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह गुरुवार को अपने बयान से पलट गए। उन्होंने अपना बचाव करते हुए कहा कि वह कोई जांच एजेंसी नहीं है, जो बाटला हाउस मुठभेड़ को सही या गलत बताएं। सिंह ने संवाददाताओं से कहा, 'मैं इस मामले की जांच नहीं कर रहा हूं। सही-गलत का फैसला मैं नहीं कर सकता क्योंकि मैं कोई जांच एजेंसी नहीं हूं।
2). शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के केंद्रीय मंत्री पर राहुल गांधी के मुंबई विरोधी बयान का विरोध नहीं करने के लिए जमकर हमला बोला...
3). सत्यम घोटाला मामले के प्रमुख आरोपी बी रामलिंग राजू और नौ अन्य के खिलाफ आरोप तय करने के बारे में सुनवाई 17 फरवरी को होग...
4). महाराष्ट्र भारतीयों का या मराठियों का, इस विवाद में अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि भी कूद पड़े हैं...