पर मैं कहता हूँ स्वर्ग की अनुभूति तो माँ के आंचल में
माँ तो बस माँ है कह नहीं सकता कुछ उसके बारे में मैंने भी तो शब्द लिए, उससे जाना दुनिया के बारे में
उंगली पकड़ चलना सीखा, हाथ पकड़ लिखना
मैं भी तो अंग उसी का क्या कह दूँ माँ के बारे में l
निर्णय लेने से पहले कभी सोचा ही नहीं हर बार माँ के पास गया और पूछ लिया मम्मी जी मैं इस काम को कैसे करूँ, माँ ने रास्ता बता दिया कोई ऐसा पल या जिन्दगी का मोड़ मुझको याद नहीं आता जब माँ ने मेरी किसी भी दिक्कत में साथ न दिया हूँ।
लेकिन दुनिया वालो सच कहूँ तो आज मैं एक निर्णय लेने में अपने आप को समर्थ महसूस नहीं कर पा रहा......आज माँ तेरी याद आ रही है दुनिया के लोग अपनी माँ को कल शुभकामनायें देंगे और मैं..............................मैंने आजतक तेरे को कभी शुभकामना नहीं दी और आज जब तू नहीं है तब तब देना चाहता हूँ, मुझे ऐसा लगता है की तू दुनिया की हर उस माँ में है जो हर बच्चे को प्यार और दुलार देती है तो तेरी याद में उन सभी को मैं नमन करता हूँ, चरण स्पर्श करता हूँ....................
2 टिप्पणियां:
मां तुम्हारे और मेरे दिल में बसी है... मैं भी अपनी मां से दूर हूं... बस मां की छवि आंखों में ऊरकर मैं भी ममता के दिन को मां का शुक्रिया अदा कर रही हूं...
deepika ji se poori tarah sehmat hun...
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