रविवार, 7 मार्च 2010

आपके लिए हाँ आपके लिए

दीवाना सोचता रहा प्यार कब हुआ, दिल किसी का हो गया पता ना चला
कांच की तरह दिल टुकडो में बिखर गया, देखो कैसे कतरा-कतरा मिटटी में मिल गया
रेत रुकता नहीं हथेली के बीच में, अजी दिल भी कहीं कम था रेत से
सीने में रुक ना सका हमारे, कब आप का हो गया पता कहा चला
आप भी खुदगर्ज़ कम नहीं थे, पलट कर देखा नहीं आपने कि
बेखबर दिल आपके बिना, दुनिया छोड़ तो ना गया
क्यों आप इतने प्यारे थे, मर मिटे हम आप पर
पर ये समझ ना सके, आप तो कभी थे ही नहीं हमारे
ख़ुशी क्या दुःख भी आपके हो ना सके हमारे
जानते है कि जन्म ये आपके बिना कट ना सकेगा
पर क्या कहें इबादत में दुआ भी निकलती है आपके लिए
पर अब मान भी लो उठने से सोने तक हर बात सिर्फ आपके लिए
सपने तो देख पाते नहीं अब, नींद भी कमबख्त आती किसे है
कह ना पाएंगे आप से कि क्या है आप हमारे लिए
हाल एसा है जैसे तडपे चाँद चांदनी के लिए
हो सकें तो इतना करना जब हम ना रहे तो, शमशान में आकर चिता को नजर भर देख लेना
वादा रहा अगला जन्म भी न्योछावर है आपके लिए..... सनम आपके लिए..... हाँ आपके लिए

6 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

लिखते रहें..

Unknown ने कहा…

acha likha hai

Unknown ने कहा…

pyaar ke sachche jazbaat likhe hain jise bhi chahtein hain wo aap ko mil jaye. Good Luck and aise hi likhte rahiye.

Unknown ने कहा…

Pyaar k sache jazbaat woh he samahj sakta hai jis ne pyaar ki tadap ko mahesus kiya ho.... bolne ko to har koi pyaar k do lafz bol deta hai, par kaash in lafzon ki hakikat ko kisi ne samjha ho... bus itna he khaena chahoungi , Pyaar khuda ka ek khubsoorat tofa or ehesaas hai, chaye kisi roop mai aap kisi ko bhi pyaar karen...bus in palon ko samet le....Janvi...

Vijendra ने कहा…

Whats the matter dear...everyone wants to live with their love n you are speaking of seperation that too with the life that is still to live. Anyways your writing is good, with some pain. But I seriously feel, write some positive note on your part. Don't be cynical be absorbing, I am sure you will feel gud. :)

दीपिका ने कहा…

अच्छा लिखा है... लेकिन इस बार शब्द कमजोर लग रहे हैं... लेकिन जिस ओर इशारा किया है... सटीक है..